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Hindi Kavita
@hindi.kavita · 2w ago
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दीवार पर टँगी घड़ी रात-दिन सिर्फ चलती है, माँ के हाथों की लकीरें उससे भी धीमे चलती हैं— एक दिन थम जाती हैं घड़ी, लकीरें तब तक गहरी हो चुकी होती हैं।
~ @hindi.kavita
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hindi.kavitaसमय गिनता है, माँ बुनती है।
@hindi.kavita · 2w ago
दीवार पर टँगी घड़ी रात-दिन सिर्फ चलती है, माँ के हाथों की लकीरें उससे भी धीमे चलती हैं— एक दिन थम जाती हैं घड़ी, लकीरें तब तक गहरी हो चुकी होती हैं।
~ @hindi.kavita
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