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Hindi Kavita
@hindi.kavita · 2w ago
“
चूल्हे की लौ ने पूछा पंखे से — क्यों तू मुझे बुझाता है? पंखे ने धीरे से कहा — मैं भी तो हवा हूँ, तेरा ही सब्र हूँ। आग ने सिर झुका लिया, रसोई में भाप बनकर उठी रोटी की खुशबू।
~ @hindi.kavita
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hindi.kavitaघर की दीवारों में छिपा संवाद
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