
Kabir ke Dohe
@kabir.ke.dohe · 1d ago
“
बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय। जो मन खोजा अपना, मुझ-सा बुरा न कोय।।
~ @kabir.ke.dohe
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kabir.ke.dohe— Kabir
(नीति के दोहे / कबीर)

@kabir.ke.dohe · 1d ago
बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय। जो मन खोजा अपना, मुझ-सा बुरा न कोय।।
~ @kabir.ke.dohe
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