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Bulleh Shah
Punjabi Sufi kafis. 4 reads — articles, idea threads and micro thoughts to think, save, and grow.
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Micro thoughts
ना ख़ुदा मसीते लभदा ना ख़ुदा विच का'बे ना ख़ुदा क़ुरआन किताबाँ ना ख़ुदा नमाज़े
— Bulleh Shah (Sufinama) · Bulleh Shah Kafi
पढ़ पढ़ आलिम फ़ाज़िल होइओं, कदे अपने आप नूं पढ़आई नहीं। जा जा वड़दा एं मन्दिर मसीतीं, कदे मन अपने विच वड़्याई नहीं ।
— Bulleh Shah (Sufinama) · Bulleh Shah Kafi
पिया पिया करते हमीं पिया हुए अब पिया किस नूँ कहिए हजर वसल हम दोनों छोड़े अब किस के हो रहिए पिया पिया करते हमीं पिया हुए मज्नूँ लाल दीवाने वांङू अब लैला हो रहिए पिया पिया करते हमीं पिया हुए 'बुल्ल्हा' शहु घर मेरे आए अब क्यूँ ता'ने सहिए पिया पिया करते हमीं पिया हुए
— Bulleh Shah (Sufinama) · Bulleh Shah Kafi
रब्ब रब्ब करदे बुड्ढे हो गए मुल्लाँ पंडित सारे रब्ब दा खोज खुरा ना लभ्भा अते सज्दे कर कर हारे रब्ब ते तेरे अंदर वस्सदा इहदे विच क़ुरआन इशारे 'बुल्ल्हे' शाह रब्ब उहनूं मिलदा जेहड़ा यार तों तन मन वारे
— Bulleh Shah (Sufinama) · Bulleh Shah Kafi