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Bhakti & Sant Poets

Devotional poetry of Kabir, Meera, Tulsidas, Surdas, Tukaram and the saints. 13 reads — articles, idea threads and micro thoughts to think, save, and grow.

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Micro thoughts

काल्‍ह करै सो आज कर, आज करै सो अब्‍ब। पल में परलै होयगी, बहुरि करैगो कब्‍ब।।

— Kabir (नीति के दोहे / कबीर) · Kabir ke Dohe

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय। जो मन खोजा अपना, मुझ-सा बुरा न कोय।।

— Kabir (नीति के दोहे / कबीर) · Kabir ke Dohe

काल करे सो आज कर, आज करे सो अब। पल में प्रलय होयगी, बहुरि करेगा कब॥

— Sant Kabir · Kabir ke Dohe

पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय। ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय॥

— Sant Kabir · Kabir ke Dohe

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय। जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय॥

— Sant Kabir · Kabir ke Dohe

साईं इतना दीजिए, जा में कुटुंब समाय। मैं भी भूखा न रहूँ, साधु न भूखा जाय॥

— Sant Kabir · Kabir ke Dohe

ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोय। औरन को शीतल करे, आपहु शीतल होय॥

— Sant Kabir · Kabir ke Dohe

साईं इतना दीजिए, जा में कुटुंब समाय। मैं भी भूखा न रहूँ, साधु न भूखा जाय॥

— Sant Kabir · Kabir ke Dohe

ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोय। औरन को शीतल करे, आपहु शीतल होय॥

— Sant Kabir · Kabir ke Dohe

दुख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोय। जो सुख में सुमिरन करे, तो दुख काहे को होय॥

— Sant Kabir · Kabir ke Dohe

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय। जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय॥

— Sant Kabir · Kabir ke Dohe

ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोय। औरन को शीतल करे, आपहु शीतल होय॥

— Sant Kabir · Kabir ke Dohe

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय। जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय॥

— Sant Kabir · Kabir ke Dohe

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