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Shayari & Ghazal
Urdu and Hindi shayari, ghazals and nazms. 46 reads — articles, idea threads and micro thoughts to think, save, and grow.
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Micro thoughts
ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
— Jaun Elia (Rekhta) · Bechaini Ke Sher
तुम तकल्लुफ़ को भी इख़्लास समझते हो 'फ़राज़' दोस्त होता नहीं हर हाथ मिलाने वाला
— Ahmad Faraz (Rekhta) · Faraz Ke Sher
दोस्ती जब किसी से की जाए दुश्मनों की भी राय ली जाए
— Rahat Indori (Rekhta) · Mushaira Ki Aag
कर रहा था ग़म-ए-जहाँ का हिसाब आज तुम याद बे-हिसाब आए
— Faiz Ahmad Faiz (paiman-e-gazal) · Subah Ki Ummeed
ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
— साहिर लुधियानवी (Rekhta) · Daily Shayari
हम हुए तुम हुए कि 'मीर' हुए उस की ज़ुल्फ़ों के सब असीर हुए
— Mir Taqi Mir (Rekhta) · Mir Ki Ghazal
इश्क़ ने 'ग़ालिब' निकम्मा कर दिया वर्ना हम भी आदमी थे काम के इश्क़ ने 'ग़ालिब' निकम्मा कर दिया वर्ना हम भी आदमी थे काम के
— Mirza Ghalib (Rekhta) · Mehfil-e-Ghalib
जो गुज़ारी न जा सकी हम से हम ने वो ज़िंदगी गुज़ारी है
— Jaun Elia (Rekhta) · Bechaini Ke Sher
किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
— Ahmad Faraz (paiman-e-gazal) · Faraz Ke Sher
शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
— Rahat Indori (Rekhta) · Mushaira Ki Aag
दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
— Faiz Ahmad Faiz (Rekhta) · Subah Ki Ummeed
हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
— Mirza Ghalib (paiman-e-gazal-avval (पृष्ठ 152)) · Mehfil-e-Ghalib
सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
— ख़्वाजा मीर दर्द (Rekhta) · Daily Shayari
अब तो जाते हैं बुत-कदे से 'मीर' फिर मिलेंगे अगर ख़ुदा लाया
— Mir Taqi Mir (paiman-e-gazal-avval) · Mir Ki Ghazal
उम्र गुज़रेगी इम्तिहान में क्या दाग़ ही देंगे मुझ को दान में क्या
— Jaun Elia (Rekhta) · Bechaini Ke Sher
सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं सो उस के शहर में कुछ दिन ठहर के देखते हैं
— Ahmad Faraz (Rekhta) · Faraz Ke Sher
तेरी हर बात मोहब्बत में गवारा कर के दिल के बाज़ार में बैठे हैं ख़सारा कर के
— Rahat Indori (Rekhta) · Mushaira Ki Aag
आए कुछ अब्र कुछ शराब आए इस के बा'द आए जो अज़ाब आए
— Faiz Ahmad Faiz (Nuskha Hai Wafa) · Subah Ki Ummeed
'उम्र-ए-दराज़ माँग के लाई थी चार दिन दो आरज़ू में कट गए दो इंतिज़ार में
— सीमाब अकबराबादी (Rekhta) · Daily Shayari
अश्क आँखों में कब नहीं आता लोहू आता है जब नहीं आता
— Mir Taqi Mir (Rekhta) · Mir Ki Ghazal
मैं भी बहुत अजीब हूँ इतना अजीब हूँ कि बस ख़ुद को तबाह कर लिया और मलाल भी नहीं
— Jaun Elia (Rekhta) · Bechaini Ke Sher
रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ
— Ahmad Faraz (Rekhta) · Faraz Ke Sher
जो गुज़ारी न जा सकी हम से हम ने वो ज़िंदगी गुज़ारी है
— जौन एलिया (Rekhta) · Daily Shayari
उस की याद आई है साँसो ज़रा आहिस्ता चलो धड़कनों से भी इबादत में ख़लल पड़ता है
— Rahat Indori (Rekhta) · Mushaira Ki Aag
और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा
— Faiz Ahmad Faiz (Rekhta) · Subah Ki Ummeed
कोई तुम सा भी काश तुम को मिले मुद्दआ हम को इंतिक़ाम से है
— Mir Taqi Mir (Rekhta) · Mir Ki Ghazal
Jo paigham maine likha tha, uska 'delivered' bhi nahi hua — bas main hi padhta hoon baar baar, aur har baar naya jawab deta hoon.
Javed Akhtar Speaks
पीपल की छाँव में हवा ने वही कहा जो अधिकारी को नहीं कहा जा सका — पत्ते हमारी तरफ़ झुके, और जड़ें खड़ी रहीं।
Subah Ki Ummeed
रंज से ख़ूगर हुआ इंसाँ तो मिट जाता है रंज। मुश्किलें मुझ पर पड़ीं इतनी कि आसाँ हो गईं॥
— Mirza Ghalib · Mehfil-e-Ghalib
Baarish ki awaaz se chhat par, sach kahin nahi bolta aadmi — bas chai garam hoti hai, aur jhooth thoda halka ho jaata hai.
Tin roof, chai, and the small mercy of rain. · Javed Akhtar Speaks
रात भर एक दीया जलता रहा, हवा से कह दो— हम बुझेंगे नहीं, बस धीमे होंगे।
एक दीया, एक रात, एक ज़िद। · Subah Ki Ummeed
दिल की राहों में तेरा नाम लिखा था कल तक, आज उसी राह पे खुद मेरा ही क़दम नहीं है।
मोहब्बत में खोकर खुद को पाने की कहानी · Daily Shayari
रात भर तेरी याद से बातें करता रहा, सुबह आई तो लगा मैं ख़ुद से ही हार गया।
यादें भी अब मुझसे थक गई हैं। · Daily Shayari
हैं और भी दुनिया में सुख़नवर बहुत अच्छे। कहते हैं कि ग़ालिब का है अंदाज़-ए-बयाँ और॥
— Mirza Ghalib · Mehfil-e-Ghalib
इश्क़ ने ग़ालिब निकम्मा कर दिया। वरना हम भी आदमी थे काम के॥
— Mirza Ghalib · Mehfil-e-Ghalib
हमने तो दिल के आइने में तेरा ही अक्स बसाया था, तू ने वही आइना पत्थर समझ कर पटक दिया।
मोहब्बत की सबसे बड़ी सज़ा यही है कि तेरा शीशा उसके हाथों में पत्थर बन जाता है। · Daily Shayari