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Love
Romance, longing and ishq. 18 reads — articles, idea threads and micro thoughts to think, save, and grow.
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Micro thoughts
इश्क़ ने 'ग़ालिब' निकम्मा कर दिया वर्ना हम भी आदमी थे काम के
— मिर्ज़ा ग़ालिब (Rekhta) · Ishq & Longing
उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए
— बशीर बद्र (Rekhta) · Ishq & Longing
अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें
— अहमद फ़राज़ (paiman-e-gazal) · Ishq & Longing
और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा
— फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ (Rekhta) · Ishq & Longing
He calls at 1 a.m. when the signal is good and the words are bad. I've learned to hear the unsaid between the static and the chain of my ceiling fan.
The Cynic in Love
किताब की जिल्द पर जमी धूल उँगली से हटाई तो नाम तुम्हारा निकला — पन्ने अब भी मुड़े हुए हैं वहीं, जहाँ तुमने पढ़ना छोड़ा था।
Ishq & Longing
He says he's not the type for labels, then saves my seat on the 8:14 local every morning. Love in this city is mostly unnamed, but the window seat knows my name.
The window seat is a commitment, da. · The Cynic in Love
He reads my horoscope before I wake, not to warn me — to be ready for whichever version of me the stars send down to breakfast.
The Cynic in Love
तेरी चाय अब भी मेज़ पर रखी है, धुँआ उठता है तो लगता है तू आएगी, मैं उँगली से कप का किनारा छूता हूँ — ठंडी है, पर मैं पीता नहीं।
कुछ चीज़ें ठंडी होकर भी रखी रहती हैं। · Ishq & Longing
तेरी चाय ठंडी हो चुकी है कप में, मैंने उसे ढक दिया है ताकि कोई और न पी ले — दरवाज़े की कुंडी आज भी खुली रखी है, जैसे तू अभी-अभी लौटेगी।
कुछ इंतज़ार शब्दों में नहीं होते, बस ठंडी होती चाय में दिखते हैं। · Ishq & Longing
तेरी चाय अब भी ठंडी पड़ी है मेज़ पर, मैं हर घूँट में तेरा इंतज़ार पी जाता हूँ। तू नहीं आई, पर कप अब भी वहीं है— जैसे कोई वादा जो टूटकर भी बाकी है।
Some cups are kept warm by waiting alone. · Ishq & Longing
तेरी चाय ठंडी हो चुकी है मेज़ पर, मैंने उसे छुआ तक नहीं — क्योंकि जिस प्याली से तू पीता था, उसकी गर्माहट अब भी मेरी हथेली में है।
कुछ चीज़ें ठंडी होकर भी गर्म रहती हैं · Ishq & Longing
तेरी चाय ठंडी हो चुकी है मेज़ पर, मैंने दूसरी बनाई है — बस वैसी ही, और तेरी कुर्सी को छुआ तक नहीं, जैसे वो अब भी तेरा इंतज़ार कर रही हो।
कुछ चीज़ें ठंडी नहीं होतीं, बस अनदेखी रह जाती हैं। · Ishq & Longing
तेरी चाय ठंडी हो चुकी है मेज़ पर, मैंने दोबारा गरम नहीं की— कहीं तू आए तो पहचान ले, ये कप अभी भी तेरा है।
कुछ चीज़ें जान-बूझकर अधूरी रखी जाती हैं। · Ishq & Longing
चाय ठंडी हो चुकी है मेज़ पर, तुम्हारा इंतज़ार भी अब रंग बदलने लगा है— जैसे वो मोड़ जहाँ से तुम मुड़े थे, अब भी हर शाम मुझे थोड़ा और तुमसे जोड़ देता है।
कुछ इंतज़ार चाय से ज़्यादा ठंडे हो जाते हैं। · Ishq & Longing
तेरी चाय ठंडी हो चुकी है मेज़ पर, मैंने फिर से उठाकर रख दी है गरम— तू आए तो पूछेगा क्यों नहीं पी, मैं कह दूँगा, इंतज़ार में रखी थी।
कुछ चीज़ें ठंडी नहीं होतीं, बस रखी रहती हैं। · Ishq & Longing
तेरी चाय अब भी वैसी ही रखी है मेज़ पर, ढक्कन खुला, भाप नहीं, स्वाद नहीं — पर जब भी हाथ बढ़ाता हूँ कप की तरफ़, लगता है तू अभी भी यहीं कहीं बैठी है।
कुछ चीज़ें ठंडी होकर भी गरम रहती हैं। · Ishq & Longing
तेरी चाय ठंडी हो चुकी है मेज़ पर, मैंने उसे छुआ तक नहीं, बस कप के किनारे तेरे होंठों का निशान ढूँढता रहा — और वो अब भी वहीं है।
Some things we keep untouched, only to keep them whole. · Ishq & Longing