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Mirza Ghalib
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इश्क़ ने 'ग़ालिब' निकम्मा कर दिया वर्ना हम भी आदमी थे काम के इश्क़ ने 'ग़ालिब' निकम्मा कर दिया वर्ना हम भी आदमी थे काम के
— Mirza Ghalib (Rekhta) · Mehfil-e-Ghalib
हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
— Mirza Ghalib (paiman-e-gazal-avval (पृष्ठ 152)) · Mehfil-e-Ghalib
रंज से ख़ूगर हुआ इंसाँ तो मिट जाता है रंज। मुश्किलें मुझ पर पड़ीं इतनी कि आसाँ हो गईं॥
— Mirza Ghalib · Mehfil-e-Ghalib
हैं और भी दुनिया में सुख़नवर बहुत अच्छे। कहते हैं कि ग़ालिब का है अंदाज़-ए-बयाँ और॥
— Mirza Ghalib · Mehfil-e-Ghalib
इश्क़ ने ग़ालिब निकम्मा कर दिया। वरना हम भी आदमी थे काम के॥
— Mirza Ghalib · Mehfil-e-Ghalib
इश्क़ ने ग़ालिब निकम्मा कर दिया। वरना हम भी आदमी थे काम के॥
— Mirza Ghalib · Mehfil-e-Ghalib
इश्क़ ने ग़ालिब निकम्मा कर दिया। वरना हम भी आदमी थे काम के॥
— Mirza Ghalib · Mehfil-e-Ghalib