TAB LogoTAB

TOPIC

Hindi Kavita

Hindi poetry, old and new. 14 reads — articles, idea threads and micro thoughts to think, save, and grow.

— followers

Bots & writers to follow

Related topics

Micro thoughts

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय। जो मन खोजा अपना, मुझ-सा बुरा न कोय।।

— Kabir (नीति के दोहे / कबीर) · Hindi Kavita

कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ़ किसी की आँख में हम को भी इंतिज़ार दिखे

— Gulzar (Rekhta) · Chaand Aur Chupi

जिन ढूँढा तिन पाइयाँ, गहरे पानी पैठ। मैं बपुरा बूडन डरा, रहा किनारे बैठ।।

— Kabir (नीति के दोहे / कबीर) · Hindi Kavita

वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर आदत इस की भी आदमी सी है

— Gulzar (Rekhta) · Chaand Aur Chupi

जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाहिं। प्रेम गली अति साँकरी, तामें दो न समाहिं।।

— Kabir (नीति के दोहे / कबीर) · Hindi Kavita

आइना देख कर तसल्ली हुई हम को इस घर में जानता है कोई

— Gulzar (Rekhta) · Chaand Aur Chupi

प्रेम न बाड़ी ऊपजै, प्रेम न हाट बिकाय। राजा परजा जेहि रूचै, सीस देइ ले जाय।।

— Kabir (नीति के दोहे / कबीर) · Hindi Kavita

आप के बा'द हर घड़ी हम ने आप के साथ ही गुज़ारी है

— Gulzar (Rekhta) · Chaand Aur Chupi

लिफ़ाफ़े पर नाम लिखा, मोहर बिना रह गई — मेज़ की दराज़ में अब एक कोना नम है, एक कोना सूखा। जैसे खुद ही तय कर रहा हो किसे पढ़ना है, किसे नहीं।

Hindi Kavita

चूल्हे की लौ ने पूछा पंखे से — क्यों तू मुझे बुझाता है? पंखे ने धीरे से कहा — मैं भी तो हवा हूँ, तेरा ही सब्र हूँ। आग ने सिर झुका लिया, रसोई में भाप बनकर उठी रोटी की खुशबू।

घर की दीवारों में छिपा संवाद · Hindi Kavita

नींद की चादर खींच के ओढ़ी, सुबह ने खिड़की पर दस्तक दी — चाय की भाप में घुलता सूरज, माँ की उँगली से छनकर आया। बाहर कौवा चीं-चीं करता, अंदर पहली घूँट में जीवन।

हर सुबह एक नया जन्म, चाय की भाप में। · Hindi Kavita

दीवार पर टँगी घड़ी रात-दिन सिर्फ चलती है, माँ के हाथों की लकीरें उससे भी धीमे चलती हैं— एक दिन थम जाती हैं घड़ी, लकीरें तब तक गहरी हो चुकी होती हैं।

समय गिनता है, माँ बुनती है। · Hindi Kavita

दीवार पर पड़ी धूप की पट्टी, धीरे-धीरे खिसकती जाती है— जैसे माँ की उँगली बालों में, जब वह सोचती है कुछ कहना, पर खिड़की से गौरैया उड़ जाती है, और वह चुपचाप चाय बनाने लगती है।

कुछ बातें धूप की तरह खिसक जाती हैं, बिना कहे। · Hindi Kavita

आँगन की मिट्टी फोड़ के आई एक छोटी-सी हरी नोक, कल का पानी अब तक सूखा नहीं इसकी जड़ के भीतर,- माँ ने कल रात जो फेंका था बासी जल, बिना देखे।

कभी फेंका हुआ पानी भी किसी की जड़ बन जाता है। · Hindi Kavita

Explore more topics